अगस्त में कौनसी फसलें और सब्जियां बोई जा सकती हैं?
- Rajat Kumar
- Jul 26
- 2 min read

भारत में अगस्त का महीना मानसून का समय होता है। इस दौरान देश के अधिकतर हिस्सों में बारिश होती है, जिससे मिट्टी नम और उपजाऊ रहती है।
आज हम जानेंगे कि अगस्त में कौनसी फसलें और सब्जियां बोई जा सकती हैं, जो भारतीय मौसम और मिट्टी के लिए उपयुक्त हों।
अगस्त का मौसम और खेती की तैयारी
अगस्त में भारत के अलग-अलग हिस्सों में मौसम की स्थिति थोड़ी अलग होती है। उत्तर भारत में बारिश का प्रभाव ज्यादा रहता है, जबकि दक्षिण भारत में बारिश कम हो सकती है।
पूर्वी और पश्चिमी भारत में भी मौसम में बदलाव देखने को मिलता है। इस समय मिट्टी में नमी की मात्रा अच्छी होती है, जो बीज बोने के लिए आदर्श है।
किसानों को खेती शुरू करने से पहले कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए:
मिट्टी की जांच: मिट्टी की उर्वरता और जल निकासी की स्थिति देखें।
खेत की सफाई: पुरानी फसलों के अवशेष और खरपतवार हटाएं।
बीज का चयन: मौसम और मिट्टी के हिसाब से अच्छी गुणवत्ता वाले बीज चुनें।
खाद और उर्वरक: जैविक खाद जैसे नव्यकोष जैविक खाद, गोबर की खाद या वर्मी कंपोस्ट का उपयोग करें।
अब हम उन फसलों और सब्जियों के बारे में विस्तार से जानेंगे, जो अगस्त में बोई जा सकती है।
अगस्त में बोई जाने वाली फसलें
1. मूंगफली
मूंगफली एक तिलहनी फसल है, जो अगस्त में बोई जा सकती है। यह फसल कम पानी और गर्म मौसम में अच्छी तरह उगती है।
उपयुक्त क्षेत्र: गुजरात, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र।
प्रकार: जे.एल-24, टी.जी-37ए, चंद्रा।
बुआई का तरीका: बीज को 4-5 सेंटीमीटर गहराई में पंक्तियों में बोएं।
ध्यान देने योग्य बातें: अच्छी जल निकासी वाली रेतीली दोमट मिट्टी चुनें। खरपतवार नियंत्रण और कीटों से बचाव के लिए समय पर जांच करें।
लाभ: मूंगफली का उपयोग तेल, नाश्ता, और मिठाइयों में होता है। इसकी बाजार में अच्छी मांग रहती है।
2. उड़द
उड़द (काली दाल) एक दलहनी फसल है, जो अगस्त में बोई जा सकती है। यह मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में भी मदद करती है।
उपयुक्त क्षेत्र: उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान।
प्रकार: पूसा-1, पंत उड़द-31।
बुआई का तरीका: बीज को 3-4 सेंटीमीटर गहराई में बोएं।
ध्यान देने योग्य बातें: मिट्टी को अच्छी तरह जोतें और जलजमाव से बचें। नाइट्रोजन फिक्सेशन के लिए राइजोबियम कल्चर का उपयोग करें।
लाभ: उड़द की मांग दाल और खाद्य उत्पादों के लिए रहती है। यह मिट्टी को उपजाऊ बनाती है।
3. तिल
तिल एक तिलहनी फसल है, जो कम पानी और गर्म मौसम में उगती है। अगस्त में इसे बोना उपयुक्त है।
उपयुक्त क्षेत्र: उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात।
प्रकार: पूसा तिल-1, आरटी-346।
बुआई का तरीका: बीज को 2-3 सेंटीमीटर गहराई में पंक्तियों में बोएं।
ध्यान देने योग्य बातें: रेतीली दोमट मिट्टी उपयुक्त है। कीटों से बचाव के लिए जैविक कीटनाशक का उपयोग करें।
लाभ: तिल का उपयोग तेल, मिठाइयों, और पूजा सामग्री में होता है। इसकी कीमत बाजार में अच्छी रहती है।
4. अरहर (तूर दाल)
अरहर एक महत्वपूर्ण दलहनी फसल है, जिसे अगस्त में बोया जा सकता है। यह लंबी अवधि की फसल है।
उपयुक्त क्षेत्र: महाराष्ट्र, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश।
प्रकार: पूसा-991, आई.सी.पी.एल-87119।
बुआई का तरीका: बीज को 5-6 सेंटीमीटर गहराई में बोएं।
ध्यान देने योग्य बातें: मिट्टी में अच्छी जल निकासी होनी चाहिए। पौधों को सहारा देने के लिए डंडे का उपयोग करें।
लाभ: अरहर की दाल की मांग सालभर रहती है और यह मिट्टी की उर्वरता बढ़ाती है।
अगस्त में बोई जाने वाली सब्जियां
सब्जियों की खेती छोटे और बड़े दोनों किसानों के लिए लाभकारी होती है। अगस्त में कई सब्जियां बोई जा सकती हैं, जो कम समय में तैयार हो जाती हैं।
1. भिंडी
भिंडी गर्म और नम मौसम में अच्छी तरह उगती है। यह छोटे खेतों के लिए अच्छा विकल्प है।
उपयुक्त क्षेत्र: पूरे भारत में, विशेष रूप से उत्तर भारत और मध्य भारत।
प्रकार: पूसा सावनी, अर्का अनामिका।
बुआई का तरीका: बीज को 1-2 सेंटीमीटर गहराई में बोएं।
ध्यान देने योग्य बातें: अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी में बोएं और समय-समय पर पानी दें। कीटों से बचाव करें।
लाभ: भिंडी की सब्जी की मांग सालभर रहती है और यह जल्दी तैयार हो जाती है।
2. टमाटर
टमाटर एक लोकप्रिय सब्जी है, जिसे अगस्त में नर्सरी में बोया जाता है और बाद में खेत में रोपा जाता है।
उपयुक्त क्षेत्र: महाराष्ट्र, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश।
प्रकार: पूसा रूबी, अर्का विकास, हीरा।
बुआई का तरीका: नर्सरी में बीज बोएं और 20-30 दिनों बाद पौधों को खेत में रोपें।
ध्यान देने योग्य बातें: पौधों को सहारा दें और फंगल रोगों से बचाव के लिए जैविक उपाय करें।
लाभ: टमाटर की कीमत बाजार में अच्छी होती है और इसकी खेती आसान है।
3. बैंगन
बैंगन की खेती अगस्त में शुरू की जा सकती है। यह सब्जी गर्मी और नमी दोनों में अच्छी तरह उगती है।
उपयुक्त क्षेत्र: उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश।
प्रकार: पूसा पर्पल लॉन्ग, अर्का नीलकंठ।
बुआई का तरीका: नर्सरी में बीज बोएं और 4-6 हफ्तों बाद पौधों को खेत में रोपें।
ध्यान देने योग्य बातें: खेत में जलजमाव न होने दें और कीटों से बचाव करें।
लाभ: बैंगन की मांग बाजार में हमेशा रहती है।
4. पालक
पालक एक पत्तेदार सब्जी है, जो अगस्त के अंत में बोई जा सकती है। यह जल्दी तैयार होने वाली सब्जी है।
उपयुक्त क्षेत्र: उत्तर भारत, विशेष रूप से पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश।
प्रकार: ऑल ग्रीन, पूसा ज्योति।
बुआई का तरीका: बीज को सीधे खेत में पंक्तियों में बोएं।
ध्यान देने योग्य बातें: मिट्टी को नम रखें और खरपतवार हटाएं।
लाभ: पालक पौष्टिक होता है और इसकी मांग बाजार में अच्छी रहती है।
5. मूली
मूली एक ऐसी सब्जी है, जो कम समय में तैयार हो जाती है और अगस्त में बोई जा सकती है।
उपयुक्त क्षेत्र: पूरे भारत में, विशेष रूप से उत्तर भारत।
प्रकार: पूसा चेतकी, जापानी सफेद।
बुआई का तरीका: बीज को 1-2 सेंटीमीटर गहराई में बोएं।
ध्यान देने योग्य बातें: मिट्टी को ढीली और नम रखें।
लाभ: मूली की खेती आसान है और यह जल्दी बाजार में बिक्री के लिए तैयार हो जाती है।
अन्य महत्वपूर्ण फसलें और सब्जियां
अगस्त में कुछ अन्य फसलें और सब्जियां भी बोई जा सकती हैं, जो स्थानीय मौसम और मिट्टी पर निर्भर करती हैं। इनमें शामिल हैं:
लौकी: गर्म और नम मौसम में अच्छी तरह उगती है। उपयुक्त किस्में: पूसा संदेश, अर्का बहार।
करेला: कड़वी लेकिन पौष्टिक सब्जी। उपयुक्त किस्में: पूसा दो मौसमी, प्रिया।
फूलगोभी: अगस्त के अंत में नर्सरी में बोई जा सकती है। उपयुक्त किस्में: पूसा दीपाली, स्नोबॉल।
ककड़ी: कम समय में तैयार होने वाली सब्जी। उपयुक्त किस्में: पूसा उदय, स्वर्ण पूर्णिमा।
जैविक खेती के लिए सुझाव
आजकल जैविक खेती की मांग बढ़ रही है। अगस्त में फसलें और सब्जियां बोते समय जैविक तरीकों का उपयोग करें:
जैविक खाद: नव्यकोष जैविक खाद ,गोबर की खाद आदि का उपयोग करें।
जैविक कीटनाशक: नीम का तेल या गौमूत्र आधारित कीटनाशक इस्तेमाल करें।
फसल चक्र: एक ही फसल को बार-बार न बोएं। फसल चक्र अपनाएं ताकि मिट्टी की उर्वरता बनी रहे।
मौसम के हिसाब से सावधानियां
अगस्त में बारिश के कारण कुछ समस्याएं आ सकती हैं। इनसे बचने के लिए:
जलजमाव से बचें: खेत में पानी जमा न होने दें। नालियां बनाकर पानी की निकासी सुनिश्चित करें।
कीट और रोग: फसलों को कीटों और फंगल रोगों से बचाने के लिए समय पर जांच करें। नीम आधारित कीटनाशक प्रभावी हो सकते हैं।
मिट्टी का ढलान: खेत को हल्का ढलान दें ताकि बारिश का पानी आसानी से निकल जाए।
अगस्त का महीना भारतीय किसानों के लिए खेती का सुनहरा समय है। इस दौरान मूंगफली, उड़द, तिल, अरहर जैसी फसलें और भिंडी, टमाटर, बैंगन, पालक, मूली जैसी सब्जियां बोई जा सकती हैं।
सही बीज, मिट्टी की तैयारी, और मौसम के हिसाब से देखभाल से किसान अच्छी पैदावार पा सकते हैं।
अगर आप भी अगस्त में खेती शुरू करना चाहते हैं, तो ऊपर दी गई जानकारी को अपनाएं और अपनी खेती को सफल बनाएं।
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